हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

बच्चों के लिए सांस्कृतिक शिविर - सम्पादक

विष्णु मन्दिर मार्खम रिचमंड हिल में स्थापित जुलाई 2018 ‘ गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए एक सांस्कृतिक शिविर ‘

यह कैम्प हर वर्ष मन्दिर के विशाल प्रांगण में अनुभवी, हिन्दी भाषी कुशल शिक्षिकाओं द्वारा संचालित होता | इसमें 6-से 13 सालके बच्चे भाग  लेते हैं | ये बच्चे मार्खम के विभिन्न क्षेत्रों से आते हैं | इस वर्ष मैं  शिविर के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्य-क्रम में गया था ,क्योंकि इस कैम्प  मेरे अपने दो पौत्र (जिनकी आयु 7और 10 के )भी भाग ले रहे थे  | मैंने देखा कि कार्यक्रम में लगभग 300 से अधिक बच्चे एक मंच पर शान्तिपूर्वक कुछ ध्वनि को उच्चारित कर रहे थे | सभी बच्चों के माता-पिता उबके भाई -बहन सभी मंच के नीचे कुर्सियों पर बैठे जलपान कर रहे थे | सभी के लिए मन्दिर की ओर से सुंदर आयोजन किया गया था | यह कैम्प दो सप्ताह के लिए था |

सारे बच्चे एक साथ बैठे सुंदर भजन ,गीत और ईश्वर भक्ति की प्रार्थनाएँ हाथ जोड़कर  कर रहे थे | उनके अध्यापक और गाइड उन्हें संकेत -भाषा से उन्हें कार्यक्रम के संकेत दे रहे थे | कार्यक्रम -दो ढाई घंटे तक चला |  बच्चों का कार्यक्रम अत्यंत रोचक और आश्चर्यजनक था | दो सप्ताह में बच्चों ने भारतीय संस्कृति, महान ग्रंथों और  देवी -देवताओं  के विषय में जो सीखा था उसे देखकर सभी बहुत प्रसन्न थे | बच्चों में नया उत्साह था |

बच्चों ने रामायण के कुछ अंशों पर आधारित लघु नाटिकाएँ प्रस्तुत कीं | कुछ बच्चों ने भारतीय नृत्य का प्रदर्शन किया |

इस प्रकार मन्दिर द्वारा आयोजित इस प्रकार के बच्चों के लिए कैम्प लगाना और भारतीय संस्कृति के विषय में उन्हें जावनकारी देना विदेश में एक बहुत बड़ी सेवा है | मैं इसके लिए मन्दिर के संस्थापक डा. दुवे जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ ,जो वेस्टइंडीज़ गयाना के मूल निवासी है और पेशे से ह्रदय रोग विशेषज्ञ हैं , न  जाने कितने ही लोगों की जान बचा चुके हैं | इस नगर में लगभग 50 से अधिक शिवालय और मन्दिर हैं ,यदि सभी मन्दिरों में बच्चों और नवयुवकों के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ, तो नवयुवकों में भारतीय संस्कृति , भाषा एवं अपनी संस्कृति  अदि के प्रति जानकारी मिलेगी और उन्हें अपने देश और पूर्वजों की दी हुई संपदा पर गर्व होगा | अन्यथा ये बच्चे एक दिन अपना इतिहास , अपना धर्म, भाषा सब कुछ भूल जाएँगे |

हम सभी को विष्णु मन्दिर के कार्यक्रमों से कुछ सीखना चाहिए |

श्याम त्रिपाठी