हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

अटल कामना ! - रश्‍मि‍ शर्मा

लम्बा जीवन न दो स्वामी

जीवन मुझे रुपहला देना

जब पाश काल का गले पड़े

किंचित पहले बतला देना 

नमन कर सकूँ जन्मभूमि को

इतनी मोहलत भर देना

भारत माँ का लाल कहाऊँ

इतनी शोहरत भर देना ।

 

महाकाल के पार चलूँ जब

अटल कामना शेष रहे

सिंधु नदी से  रामेश्वरं तक

यह एक सूत्र में देश रहे ।

पोखरण की रणभेरी अब

कभी ना मद्धम होने पाए

नदी देश की मिले नदी से

न सूखा पड़े ,बाढ़ न आए ।

स्वतन्त्रता की वर्षगाँठ पर

क्योंकर प्राण तजें  अपने

यह पावन दिन देखने को

निशदिन नयन सजे सपने ।

मृत्यु अटल है ‘अटल’ अमर है

 यह विश्वास मैं लेकर जाऊँ

लौटूँ भारत माँ के आँचल में

फिर -फिर जन्म यहीँ पर पाऊँ ।

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