हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

घर और मकान - अवनि जैन

अवनि जैन

एक मकान एक घर बन जाता है

अगर कोई थोड़ी देर वहाँ ठहर जाता है ।

एक मकान सिर्फ लकड़ी कील और और  ईंट होता है

मगर एक घर में कोई  हँसता ,खाता और सोता है ।

एक घर बड़ा हो सकता है या छोटा

रहने वाला पतला हो सकता है या मोटा।

एक घर में होती है हर सुबह पढ़ाई

और कभी कभी होती है बच्चों की लड़ाई ।

एक मकान को घर बनाने के लिये चाहिए परिवार

इन्सानों को परिवार बनाने के लिए चाहिए प्यार ।

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