हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

समय की दौड़ में - सिद्धार्थ वत्स

इस समय की दौड़ में तुम्हें हमेशा ही हराना है

जिस क्षण का तुम पीछा कर रहे हो

उसकी शुरुआत ही उसके अंत से होती है

बस इतनी छोटी -सी है यह ज़िंदगी

पलक झपकी नहीं कि युग बदल गया

आज मैं तुम्हारे सामने नाम सहित हूँ

जल्द ही धुंधला चेहरा बनकर रह जाएगा

बुढ़ापे में बचपन की यादों में

एक राज गहरा बनकर रह जाएगा

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सिद्धार्थ वत्स

हिन्दी छात्र, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो