हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

संग्रहणीय अंक - सम्पादक

संग्रहणीय अंक

हिन्दी चेतना का जन. मार्च 2019 अंक पढ़ा । स्तरीय रचनाओं, आलेखों  समीक्षाओं से सुसज्जित  अंक के लिए सम्पादक मंडल को हार्दिक बधाई, श्याम त्रिपाठी जी ने सम्पादकीय में देश की राजनीति पर जो  रोष प्रकट किया है वह सही है, आज राजनीति और राजनीतिज्ञ तमाशा बन कर रह गए हैं । हर एक पर स्वार्थ हावी है, नैतिकता, मान मर्यादा ही भूल गए हैं।लघुकथा -प्रतियोगियों की  तथा अन्य लघुकथाएँ बहुत सुंदर हैं।मेरी रचनाओं को भी सम्मिलित करने के लिए आभारी हूँ।सुकेश साहनी जी की मेरी रचना प्रक्रिया उनकी लघुकथाओं की तरह रोचक एवं ज्ञानवर्धक है। सीधे ,सहज शब्दों में  वह अपने  मन के भावों को लेखनीबद्ध करने में सिद्धहस्त हैं।
प्रेमचंद  अनिल प्रभा कुमार तथा प्रियांका गुप्ता की कहानियाँ मन पर गहरा प्रभाव छोड़ गई हैं।  

दृष्टि ,डॉ. पद्मजा शर्मा द्वारा नीरज जी से स्मरणीय साक्षात्कार ,   चन्द्रसेन विराट रघुबीर शर्मा ,कमला निखुर्पा, कृष्णा वर्मा रश्मि शर्मा की कविताएँ, दोहे,क्षणिकाएँ ,तथा  नवलेखन के अंतर्गत नवअंकुरों का प्रयास प्रशंसनीय है।डॉ.पूर्वा, डॉ कविता भट्ट के आलेख,केशकला अकादमी,’इनबॉक्स ‘ वाला ई-आदमी, बाज़ार में आदमी व्यंग्य रुचिकर हैं।
स्मृति शेष में अगले अंक में हिमांशु जोशी जी की कोई रचना पढ़ने को मिल जाए तो अच्छा लगेगा। सच्ची श्रद्धांजलि भी होगी।
वास्तव में यह अंक पठनीय तो है ही, संग्रहणीय भी है।पुन: बधाई। और अंत में चलते -चलते दो टूक बात कहने, सत्य को उजागर करने का  रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी का साहस सराहनीय है।

सुदर्शन रत्नाकर ,ई-29, नेहरू ग्राँऊड , फ़रीदाबाद 121001