हिन्दी प्रचारिणी सभा: ( कैनेडा)
की अन्तर्राष्ट्रीय त्रैमासिक पत्रिका

मेरे शौक - सिद्धार्थ वत्स

इंसान के शौक से ही उसके व्यक्तित्व की पहचान होती है। पता चलता है कि वह किस किस्म का इंसान है, उसे क्या पसंद और नापसंद है। वैसे तो मेरे काफी शौक हैं जैसे गाना, पियानो बजाना, बास्केटबॉल खेलना, किताबें पढ़ना, तस्वीरें खींचना आदि ,लेकिन इन सबमें एक खास शौक ऐसा है जो मुझे बहुत लुभाने लगा है वह है लिखना। मैं कभी-कभार अंग्रेजी में लिखता था, लेकिन जबसे मेरी हिंदी कक्षा शुरू हुई है ,मुझे हिन्दी में लिखने की दिलचस्पी हो गयी है। हिंदी एक बहुत ही मधुर और सरल भाषा है जिसमें हम अपने शब्दों में बहुत कुछ कह सकते हैं। मैं हिंदी की तकनीकें सीख रहा हूँ। इस माध्यम से मेरी हिंदी तो बेहतर हो रही है साथ ही में मैं लिखना भी सीख रहा हूँ। अब जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं हिंदी में लिखने की कोशिश करता हूँ। फिर चाहे वे कुछ वाक्य हों या कविता। जब कभी मेरे मन में दुविधा होती है मैं कागज को अपनी दुविधाओं से सजा देता हूँ। और अब मुझे लगता है कि धीरे-धीरे ही सही मैं हिन्दी लेखन में बेहतर हो रहा हूँ। और अब यह मेरी एक नयी रुचि के रूप में साबित हो रही है। मेरा मन है कि मैं हिंदी में एक किताब लिखूँ। मैं कोशिश करूँगा कि मेरे हिंदी लेख इतने अच्छे हो जाएँ कि अपनी हिंदी प्राध्यापक को प्रसन्न कर पाऊँ। उनकी प्रसन्नता ही मेरी पूँजी होगी।

-0- सिद्धार्थ वत्स ,हिन्दी छात्र, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो